मजहब के नाम पर न लड़ना, न बंटना तुम
जब बात हो वतन की, तो बस एक होकर चलना तुम।"
संपादक-धनंजय ओझा-निष्पक्ष धारा

चंदौली जनपद की पावन धरा ने बुधवार को एक ऐसा दृश्य देखा, जो इतिहास के पन्नों में सुनहरे अक्षरों में दर्ज हो गया। चहनिया ब्लॉक स्थित समुदपुर ग्राम सभा में न तो किसी राजनीतिक दल का झंडा था, न ही किसी जाति विशेष का नारा। यहाँ सिर्फ एक ही धर्म था ‘इंसानियत’, और एक ही जाति थी ‘भारतीयता’।
अवसर था 'जय भारत मंच' द्वारा आयोजित 'सर्वधर्म समाज एवं अनेकता में एकता' कार्यक्रम का। चहनिया ब्लॉक के पूर्व प्रमुख उपेंद्र सिंह 'गुड्डू' के आवास पर आयोजित इस महाकुंभ ने यह सिद्ध कर दिया कि अगर नीयत साफ हो और उद्देश्य राष्ट्रभक्ति हो, तो समाज की हर दीवार ढह जाती है।

उपेंद्र सिंह 'गुड्डू': एक भगीरथ प्रयास, एक नई लकीर
अक्सर भीड़ जुटाना आसान होता है, लेकिन दिलों को जोड़ना सबसे कठिन। पूर्व ब्लॉक प्रमुख उपेंद्र सिंह 'गुड्डू' ने इस कठिन चुनौती को स्वीकार किया। यह आयोजन किसी चुनावी रैली का हिस्सा नहीं था, बल्कि यह एक संकल्प था सर्वसमाज को एक जाजम पर लाने का। जैसे-जैसे क्षेत्र में खबर फैली, लोग दौड़े चले आए। उनके मन में यह विश्वास था कि यह मंच उन्हें बांटने के लिए नहीं, बल्कि जोड़ने के लिए सजाया गया है। उपेंद्र सिंह ने अपने प्रयासों से यह संदेश दिया कि हम अलग-अलग पंथ, मजहब या संप्रदाय से हो सकते हैं, लेकिन जब बात 'हिंदुस्तान' की आती है, तो हमारी धड़कनें एक हो जाती हैं।
नारा:
अलग भाषा, अलग वेश, फिर भी अपना एक देश।
जात-पात को छोड़ दो, भारत को दिल से जोड़ लो।
इंद्रेश कुमार जी का वो सम्बोधन, जिसने थाम दीं धड़कनें
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य और जय भारत मंच के मार्गदर्शक डॉ. इंद्रेश कुमार जी जब मंच पर आए, तो दृश्य देखने लायक था। 7000 से 8000 की भीड़ का शोर, जो कुछ क्षण पहले गूंज रहा था, अचानक एक पवित्र सन्नाटे में बदल गया।
इंद्रेश जी के मुख से निकले शब्द किसी भाषण की तरह नहीं, बल्कि किसी अपनत्व भरे संवाद की तरह थे। उनकी बातों में न राजनीति थी, न द्वेष। उन्होंने जब आपसी सौहार्द और प्रेम का पाठ पढ़ाया, तो वहां मौजूद हर व्यक्ति मंत्रमुग्ध हो गया। ऐसा प्रतीत हुआ मानो लोग इंद्रेश जी के विचारों के दीवाने हो गए हों। यह उस विचारधारा की जीत थी जो नफरत को नहीं, बल्कि प्रेम को खाद-पानी देती है।
संस्कृति और राष्ट्रभक्ति का अनूठा संगम
कार्यक्रम की शुरुआत बुधवार सुबह 9 बजे एक अत्यंत भावुक और सांस्कृतिक अनुष्ठान के साथ हुई। 108 कन्याओं का पूजन कर नारी शक्ति को नमन किया गया। इसके बाद भारत माता के चित्र पर पुष्पवर्षा और दीप प्रज्वलन ने माहौल को देशभक्ति के रंग में रंग दिया। मंच पर एक अद्भुत नजारा तब दिखा जब लगभग 5000 लोगों ने एक साथ खड़े होकर राष्ट्रगान गाया, और उसके बाद गायत्री मंत्र व महामृत्युंजय मंत्र के जाप से पूरा वातावरण गूंज उठा।
नारा:
संस्कारों की ज्योति जलाएं, भेदभाव को दूर भगाएं।
शिक्षा, सेवा और संस्कार, यही है जय भारत मंच का आधार।
जय भारत मंच: सेवा और संस्कार की प्रतिज्ञा
जय भारत मंच के राष्ट्रीय कार्यकारिणी अध्यक्ष नरेंद्र शर्मा और राष्ट्रीय महामंत्री अर्जुन सिंह ने अपने विचारों से यह स्पष्ट कर दिया कि इस मंच का उद्देश्य केवल भीड़ इकट्ठा करना नहीं, बल्कि समाज में 'शिक्षा, सेवा और संस्कार' के बीज बोना है। काशी प्रांत अध्यक्ष उपेंद्र सिंह ने जब मंच से एकता का उद्घोष किया, तो हर किसी ने तालियों की गड़गड़ाहट से उनका समर्थन किया।
अतिथि देवो भव: एक सफल समापन
कार्यक्रम में चंदौली ही नहीं, बल्कि आसपास के जनपदों से भी भारी जनसैलाब उमड़ा। आयोजक उपेंद्र नाथ सिंह 'गुड्डू' और उनकी टीम, जिसमें जिलाध्यक्ष के.के. सिंह शामिल थे, ने न केवल विचारों की दावत दी, बल्कि सभी आगंतुकों के लिए भोजन (भंडारे) की भी उत्तम व्यवस्था की। प्रशासन की चाक-चौबंद सुरक्षा और स्वयंसेवकों के समर्पण ने इस आयोजन को निर्विघ्न संपन्न कराया। शाम होते-होते हर व्यक्ति अपने घर लौटते समय अपने साथ एक ही संदेश लेकर गया कि हम सब एक हैं। समुदपुर में हुआ यह आयोजन केवल एक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि यह एक शुरुआत थी। एक ऐसी शुरुआत, जहाँ नफरत के लिए कोई जगह नहीं है, और जहाँ हर दिल सिर्फ भारत के लिए धड़कता है।