चंदौली। उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले में बिजली विभाग की एक बड़ी लापरवाही और भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। सकलडीहा क्षेत्र के शिवपुर पपौरा गांव में विभाग ने एक ऐसी "जादुई" बिजली पहुंचाई है, जिसमें न तार है, न पोल, लेकिन बिल हजारों में आ रहा है। इस सिस्टम की मार झेल रहे 70 वर्षीय बुजुर्ग रामकेवल राम अब दफ्तरों के चक्कर काटकर थक चुके हैं।
क्या है पूरा मामला?
रामकेवल राम के अनुसार, विभाग की कार्यप्रणाली किसी मजाक से कम नहीं है: तारीख: 26 अप्रैल 2023 को बिजली विभाग के कर्मचारी उनके घर पहुंचे।
कार्रवाई: उनकी पत्नी चमेली देवी के नाम पर मीटर लगा दिया गया और कनेक्शन की रसीद थमा दी गई।
आश्वासन: कर्मचारियों ने वादा किया था कि जल्द ही पोल गाड़कर और तार जोड़कर सप्लाई चालू कर दी जाएगी।
हकीकत: करीब एक साल बीत जाने के बाद भी न तो वहां पोल लगा और न ही बिजली का तार पहुंचा। घर में अंधेरा बरकरार है, लेकिन विभाग ने 10 हजार रुपये का बिल भेज दिया।
"साहब! घर में एक बल्ब तक नहीं जला, तार तक नहीं जुड़ा, फिर ये 10 हजार का बिल कैसे आ गया? दफ्तर जाता हूं तो कोई सुनने वाला नहीं है।
— रामकेवल राम, पीड़ित बुजुर्ग
चंदौली में आम हुई ऐसी घटनाएं
यह कोई इकलौता मामला नहीं है। चंदौली के विभिन्न इलाकों में बिजली विभाग की ऐसी कार्यशैली पहले भी उजागर हो चुकी है:
सौभाग्य योजना की विफलता: नियामताबाद के धपरी गांव में भी सौभाग्य योजना के तहत मीटर तो टांग दिए गए, लेकिन कनेक्शन न होने के बावजूद बिल आने पर ग्रामीणों ने भारी प्रदर्शन किया था। कागजी कनेक्शन: विभाग अक्सर कागजों पर लक्ष्य पूरा करने के लिए मीटर लगा देता है, लेकिन जमीनी स्तर पर इंफ्रास्ट्रक्चर (पोल और तार) का काम अधूरा छोड़ दिया जाता है।
भ्रष्टाचार या तकनीकी चूक?
बिना सप्लाई के बिल आना सीधे तौर पर विभाग की डेटा फीडिंग और जमीनी सर्वे में भारी चूक को दर्शाता है। इसे भ्रष्टाचार इसलिए भी कहा जा रहा है क्योंकि पीड़ित बुजुर्ग द्वारा बार-बार शिकायत करने के बावजूद अधिकारी मामले को सुलझाने के बजाय उन्हें टाल रहे हैं।