जौनपुर/नई दिल्ली:
सरकारी जमीन से अवैध कब्जा हटवाने में लापरवाही और कोर्ट के आदेशों की अनदेखी करना जौनपुर के जिलाधिकारी को भारी पड़ गया है। सुप्रीम कोर्ट ने प्रशासन के ढुलमुल रवैये पर सख्त नाराजगी जताते हुए जिलाधिकारी पर 50,000 रुपये का जुर्माना लगाया है। यह मामला जौनपुर के सदर तहसील के कंधरपुर गांव का है। यहाँ करीब 6 बीघा ग्राम समाज की जमीन पर अवैध कब्जे को लेकर 1966 में जय प्रकाश दुबे ने कानूनी लड़ाई शुरू की थी।प्रशासन की हीलाहवाली के बीच 2017 में जय प्रकाश दुबे का निधन हो गया, जिसके बाद उनके भाई सत्य प्रकाश दुबे इस मामले को सुप्रीम कोर्ट तक लेकर गए।न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और न्यायमूर्ति आर. महादेवन की खंडपीठ ने प्रशासन के रवैये को बेहद 'कैजुअल' (लापरवाह) बताया। कोर्ट ने कहा कि शासन द्वारा दाखिल हलफनामे के तर्क संतोषजनक नहीं हैं।अदालत ने निर्देश दिया है कि जुर्माने की राशि दो सप्ताह के भीतर जमा की जाए।
इस मामले की अगली सुनवाई अब 24 मार्च 2026 को तय की गई है।
यह पहली बार नहीं है जब जौनपुर डीएम पर कोर्ट ने सख्ती दिखाई हो
मार्च 2025 इलाहाबाद हाई कोर्ट ने धर्मापुर ब्लॉक के अविश्वास प्रस्ताव मामले में नोटिस भेजने में देरी के लिए 10,000 रुपये का जुर्माना लगाया था।दिसंबर 2024 एक अन्य मामले में कोर्ट के आदेश का पालन न करने पर भी 10,000 रुपये का हर्जाना लगाया गया था।सुप्रीम कोर्ट की इस कार्रवाई से प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। पीड़ित परिवार का कहना है कि आधी सदी के संघर्ष के बाद अब उन्हें न्याय की उम्मीद जगी है।